आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस

आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस

आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस

चर्चा में क्यों:

  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 13 अक्टूबर को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।

उद्देश्य:

  • यह दिवस जोखिम जागरूकता और आपदा न्यूनीकरण की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
  • यह उन जोखिमों पर लगाम लगाने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ा रहे हैं जिनका लोग सामना कर रहे हैं।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस आपदा जोखिम और जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका में नुकसान को कम करने की दिशा में हुई प्रगति को स्वीकार करने का अवसर प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि:

  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पहली बार वर्ष 1989 में मनाया गया था,
  • जब संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने आपदा न्यूनीकरण और जोखिम-जागरूकता की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक दिन का आह्वान किया था।
  • 2015 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर संयुक्त राष्ट्र के तीसरे विश्व सम्मेलन सेंडाई (जापान) में आयोजित किया गया था
  • अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया गया था कि आपदाएं स्थानीय स्तर पर सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती हैं,
  • जीवन की हानि और सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल का कारण बनती हैं।

आपदा जोखिम में कमी:

  • संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (United Nations Office for Disaster Risk Reduction – UNDRR) दुनिया भर में जोखिम की स्थिति की जांच के लिए हर दो साल में विचारकों, विशेषज्ञों, चिकित्सकों और नवप्रवर्तकों के साथ काम करता है।

कडावुर स्लेंडर लॉरिस सैंक्चुरी (Slendor Loris Centuary)

कडावुर स्लेंडर लॉरिस सैंक्चुरी (Slendor Laurice Centuary)

चर्चा में क्यों:

  • स्लेंडर लॉरिस (Slender Loris) को बचाने के लिए तमिलनाडु सरकार ने करूर और डिंडिगुल जिले (Karur & Dindigul) में 11,806 हेक्टेयर के जंगल को सैंक्चुरी बना दिया है.
  • इस सैंक्चुरी का नाम है कडावुर स्लेंडर लॉरिस सैंक्चुरी (Kadavur Slender Loris Sanctuary).

मुख्य बिंदु:

  • स्लेंडर लॉरिस सिर्फ भारत और श्रीलंका में ही मिलता है.
  • हालांकि लॉरिस की अन्य प्रजातियां दक्षिण एशियाई देशों में जैसे- मलेशिया, इंडोनेशिया, जकार्ता आदि जगहों पर मिलती हैं.
  • कुछ अफ्रीका में भी मिलती हैं. पर स्लेंडर लॉरिस पतला होता है.
  • यह सिर्फ भारत और श्रीलंका में ही मिलता है.
  • इसकी दो प्रजातियां होती हैं. रेड स्लेंडर लॉरिस (Red Slender Loris) और ग्रे स्लेंडर लॉरिस (Grey Slender Loris).
  • ये अपना ज्यादा समय पेड़ों के ऊपर बिताते हैं. धीमे-धीमे चलते हैं. इसलिए इन्हें स्लो लॉरिस (Slow Lorris) भी बुलाते हैं.
  • स्लेंडर लॉरिस आमतौर पर ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट, झाड़ियों वाले जंगल और दलदली इलाकों के आसपास मिलते हैं.
  • ये आमतौर पर कीड़े, छिपकलियां, पौधों नए तने और फल खाते हैं. शिकार करना सही समय रात ही होता है.
  • पहले इन्हें लेमूर (Lemur) बंदरों की प्रजाति के साथ शामिल किया जाता था. लेकिन बाद में अलग कर दिया गया.
  • हालांकि यह एक प्राइमेट (Primate) है. लेकिन पूरा बंदर नहीं कह सकते.

किन नामों से पुकारा जाता है अलग अलग देशों में:

  • भारत में स्लेंडर लॉरिस को अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है.
  • तेलुगू में देवांगा पिल्ली या आरावी पापा कहते हैं. तुलू में काडा नारामणि और मराठी में वानर मनुष्य कहते हैं.
  • केरल में कुट्टी थेवांगु कहते हैं. मलयालम में कट्टू पापा कहते हैं.
  • श्रीलंका में इन्हें सिंहाला भाषा में उनआहापुलुवाला बुलाते हैं.
  • स्लेंडर लॉरिस आमतौर पर समुद्र तल से 470 मीटर के ऊपर वाले इलाके में रहते हैं.

खतरे में अस्तित्व:

  • तमिलनाडु में इनकी संख्या लगातार घट रही है.
  • स्थानीय लोग यह मानते हैं कि स्लेंडर लॉरिस के पास कोई मेडिकल या मैजिकल पावर है. इसलिए इनका शिकार होता रहा है.
  • इसके अलावा इनकी स्मगलिंग भी होती है. इनके जंगल खत्म हो गए.
  • ICUN ने इस जीव को विलुप्त होते जीवों की लिस्ट में डाल रखा है. इसलिए इनके सरंक्षण के लिए यह सैंक्चुरी बनाई गई है.

क्या है पीएम-डिवाइन योजना (PM-DevINE Scheme) ?

पीएम-डिवाइन' योजना

चर्चा में क्यों:

  • पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए, एक नई योजना ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल’ (पीएम-डिवाइन) को मंजूरी दे दी है.
  • इस योजना को वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के लिए लागू किया गया है. इसे 15वें वित्त आयोग के शेष चार वर्षों के लिए मंजूरी दी गयी है.

क्या है ‘पीएम-डिवाइन’ योजना?:

  • यह एक केंद्र प्रायोजित विकास योजना है, जो 100 प्रतिशत केन्द्रीय वित्त पोषण पर आधारित है.
  • यह योजना नार्थ-ईस्ट रीजन के बुनियादी ढांचे के निर्माण, सामाजिक विकास परियोजनाओं, उद्योगों को पूर्ण सहयोग देंगी.
  • साथ ही यह युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी.
  • इसे पूर्वोत्तर परिषद, केंद्रीय मंत्रालयों या एजेंसियों की मदद से डोनर मंत्रालय द्वारा लागू किया जायेगा.

केन्द्रीय बजट 2022-23 में की गयी घोषणा: 

  • इस योजना को घोषणा केन्द्रीय बजट 2022-23 में की गयी थी. जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को एक नई गति देगा.
  • 6,600 करोड़ का बजट: इस केन्द्रीय योजना पर 6,600 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे.
  • इसे 15वें वित्त आयोग के शेष चार वर्षों की अवधि के लिए लागू किया गया है.
  • साथ ही इस योजना के लक्ष्यों को वर्ष 2025-26 तक पूरा करने का प्रयास किया जायेगा.

पीएम-डिवाइन का उद्देश्य:

  • बुनियादी ढांचे का विकास: इस योजना की मदद से नार्थ-ईस्ट रीजन में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया जायेगा, जो पीएम गति शक्ति मेगा प्रोजेक्ट से प्रेरित है.
  • सामाजिक विकास परियोजना: पीएम-डिवाइन का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्रों में चल रही सभी प्रकार की सामाजिक विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना है साथ ही इनके क्रियान्वयन में कोई बाधा ना आये इस बात को सुनिश्चित किया जायेगा.
  • रोजगार:पीएम-डिवाइन की मदद से नार्थ-ईस्ट रीजन में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे जिससे वहां के निवासियों को इसके लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा. साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए नये आजीविका के साधन का विकास किया जायेगा.